हिन्दी साहित्य को सम्मानित करने की कोशिश में एक छोटा सा प्रयास, हिन्दी की श्रेठ कविताओं, ग़ज़लों, कहानियों एवं अन्य लेखों को एक स्थान पर संकलित करने की छोटी सी कोशिश...

Sudarshan - Sach Ka Sauda | सुदर्शन - सच का सौदा | Story


सुदर्शन जी की यह कहानी एक आम व्यक्ति के  सपने और सच का साथ देने की कहानी है।  लेकिन सच का साथ देना हमेशा आसान नहीं होता।  यह कहानी वैसे तो पुरानी है पर हर समय  और कालखण्ड के लिए हमेशा प्रेरणादायक रहेगी।  

Gulzar - Poore Ka Poora Aakash Ghuma Kar Baazi Dekhi Maine | गुलज़ार - पूरे का पूरा आकाश घुमा कर बाज़ी देखी मैने | Poem

गुलज़ार साब की यह कविता मुझे बेहद पसंद है, इसमें जिस तरह से गुलज़ार साब और भगवान के बीच जिसे वो ‘बड़े मियां’ कहते है, उनके साथ की शतरंज की बाज़ी का चित्रण है वह बहुत ही रोमांचक है। कविता के साथ साथ यह हम मनुष्यों के संघर्ष की भी कहानी है कि कैसे हमने आग की खोज की फिर उसके बाद आज चाँद तक भी पहुंच गए है।  अपने विचार इस कविता के बारे में नीचे कमेंट बॉक्स में अवश्य शेयर करे।  धन्यवाद ! 

Premchand - Ghar Jamai | प्रेमचंद - घर जमाई | Story

Ghar Jamai Story by Premchand

हरिधन जेठ की दुपहरी में ऊख में पानी देकर आया और बाहर बैठा रहा। घर में से धुआँ उठता नजर आता था। छन-छन की आवाज भी आ रही थी। उसके दोनों साले उसके बाद आये और घर में चले गए। दोनों सालों के लड़के भी आये और उसी तरह अंदर दाखिल हो गये; पर हरिधन अंदर न जा सका। इधर एक महीने से उसके साथ यहाँ जो बर्ताव हो रहा था और विशेषकर कल उसे जैसी फटकार सुननी पड़ी थी, वह उसके पाँव में बेड़ियाँ-सी डाले हुए था। कल उसकी सास ही ने तो कहा, था, मेरा जी तुमसे भर गया, मैं तुम्हारी जिंदगी-भर का ठीका लिये बैठी हूँ क्या ? और सबसे बढ़कर अपनी स्त्री की निष्ठुरता ने उसके हृदय के टुकड़े-टुकड़े कर दिये थे। वह बैठी यह फटकार सुनती रही; पर एक बार तो उसके मुँह से न निकला, अम्माँ, तुम क्यों इनका अपमान कर रही हो ! बैठी गट-गट सुनती रही। शायद मेरी दुर्गति पर खुश हो रही थी। इस घर में वह कैसे जाय ? क्या फिर वही गालियाँ खाने, वही फटकार सुनने के लिए ? और आज इस घर में जीवन के दस साल गुजर जाने पर यह हाल हो रहा है। मैं किसी से कम काम करता हूँ ? दोनों साले मीठी नींद सो रहते हैं और मैं बैलों को सानी-पानी देता हूँ; छाँटी काटता हूँ। वहाँ सब लोग पल-पल पर चिलम पीते हैं, मैं आँखें बन्द किये अपने काम में लगा रहता हूँ। संध्या समय घरवाले गाने-बजाने चले जाते हैं, मैं घड़ी रात तक गाय-भैंसे दुहता रहता हूँ। उसका यह पुरस्कार मिल रहा है कि कोई खाने को भी नहीं पूछता। उल्टे गालियाँ मिलती हैं।

Shakeel Badayuni - Badle Badle Mere Sarkaar Nazar Aate Hai | शकील बदायूँनी - बदले बदले मेरे सरकर नज़र आते हैं | Ghazal

शकील बदायूँनी की बदले बदले मेरे सरकार नज़र आते हैं 

बदले बदले मेरे सरकार नज़र आते हैं ।
घर की बरबादी के आसार नज़र आते हैं ।

Amrita Pritam - Ek Jeevi, Ek Ratri, Ek Sapna | अमृता प्रीतम - एक जीवी, एक रत्नी, एक सपना | Story

पालक एक आने गठ्ठी, टमाटर छह आने रत्तल और हरी मिर्चें एक आने की ढेरी "पता नहीं तरकारी बेचनेवाली स्त्री का मुख कैसा था कि मुझे लगा पालक के पत्तों की सारी कोमलता, टमाटरों का सारा रंग और हरी मिर्चों की सारी खुशबू उसके चेहरे पर पुती हुई थी।

एक बच्चा उसकी झोली में दूध पी रहा था। एक मुठ्ठी में उसने माँ की चोली पकड़ रखी थी और दूसरा हाथ वह बार-बार पालक के पत्तों पर पटकता था। माँ कभी उसका हाथ पीछे हटाती थी और कभी पालक की ढेरी को आगे सरकाती थी, पर जब उसे दूसरी तरफ बढ़कर कोई चीज़ ठीक करनी पड़ती थी, तो बच्चे का हाथ फिर पालक के पत्तों पर पड़ जाता था। उस स्त्री ने अपने बच्चे की मुठ्ठी खोलकर पालक के पत्तों को छुडात़े हुए घूरकर देखा, पर उसके होठों की हँसी उसके चेहरे की सिल्वटों में से उछलकर बहने लगी। सामने पड़ी हुई सारी तरकारी पर जैसे उसने हँसी छिड़क दी हो और मुझे लगा, ऐसी ताज़ी सब्जी कभी कहीं उगी नहीं होगी।

Wasim Barelvi - Mohabbat Ke Dino Ki Yahi Kharabi hai | वसीम बरेलवी - मुहब्बतों के दिनों की यही ख़राबी है | Ghazal

वसीम बरेलवी का नाम ग़ज़ल की दुनिया में किसी परिचय का मोहताज़ नहीं है। उनकी दिल को छूती ग़ज़लें ही उनका परिचय है। वसीम साहब बरेली (उत्तर प्रदेश) में रुहेलखंड विश्वविद्यालय में उर्दू विभाग में प्रोफ़ेसर हैं। हिंदी कला आज आपके लिए प्रस्तुत कर रहे है उनकी एक बहुत मशहूर ग़ज़ल 'मुहब्बतों के दिनों की यही ख़राबी है'

Rahat Indori - Bulati Hai Magar Jane Ka Nai | राहत इन्दौरी - बुलाती है मगर जाने का नईं | Ghazal

राहत इन्दौरी की यह ग़ज़ल मुझे बेहद पसंद है, इसमें सो 'नई' शब्द का प्रयोग हुआ है उसका मतलब 'नया' नहीं, उसका मतलब 'नहीं' है क्योंकि कुछ सालो पहले ग़ज़ल में 'नहीं' का उच्चारण 'नई' होता था।  राहत साब ने इस ग़ज़ल में उसी उच्चारण का प्रयोग किया है, इसलिए आपसे आग्रह है इसको पढ़ते समय इसे 'नाई' करके पढे।  

Premchand - Poos Ki Raat | प्रेमचंद - पूस की रात | Story

समाचार में जब देखा कि एक राजनीतिक रैली में एक किसान ने आत्महत्या कर ली और सभी मूकदर्शक बने देखते रहे और अब उसकी मौत के बाद भी उस गरीब की मौत को हर एक राजनीतिक पार्टी उसका अपने तरीके से फायदा उठाने की कोशिश कर रही है। मुझे प्रेमचंद की यह कहानी याद आ गयी जिसमे एक गरीब किसान क़र्ज़ के नीचे दबा हुआ कैसे कड़क ठण्ड में अपनी फसल की रखवाली कर रहा है  कुत्ते के साथ और कैसे वह अपनी रात गुज़ारता है।

Saadat Hasan Manto - Khuda Ki Kasam | सआदत हसन मंटो - खुदा की कसम | Story

जब भी मंटो की कहानियो को पढता हूँ तो लगता है शायद मंटो ने यह सब बहुत करीब से देखा और महसूस किया होगा क्योंकि सिर्फ परिकल्पना से कोई इतना सहज और दयनीय चित्रण नहीं कर सकता।  'खुदा की कसम' भी मंटो की बंटवारे के दर्द को बयां करती कहानी है लेकिन ये कहानी सिर्फ अपनों के खोने की नहीं है, ये कहानी अपनों की आँखों में ज़िंदा रहकर भी खो  जाने की है।

Ismat Chughtai - Bhabhi | इस्मत चुग़ताई - भाभी | Story

इस्मत चुग़ताई जी उर्दू की बहुत ही उम्दा लेखक रही है और उन कुछ मुस्लिम लेखको में से है जिन्होंने बंटवारे के बाद हिंदुस्तान में रहने का फैसला किया। अपनी लघुकथा 'गरम हवा' के लिए १९७५ में सर्वश्रेठ कहानी का फिल्मफेयर पुरुष्कार भी जीत चुकी है. उनकी यह कहानी पुरुष मानसिकता और महिलाओं की उस समय की स्तिथि को बयान करती है, आशा है आपको भी यह कहानी बहुत पसंद आयेगी।

Premchand - Kafan | प्रेमचंद - कफ़न | Story

प्रेमचंद जी की यह कहानी आज भी हमारे देश के भुलाये गए गरीब तबके के उन तमाम लोगो की स्तिथि बयान करती है जो समाज की ढकोसली परम्पराओ का वहन करने के कारण गरीबी में जिये जा रहे है। यह कहानी हमारे समाज की उन सारे रूढ़िवादी परम्पराओ पर एक कटाक्ष करती है और दिखाती है कि एक गरीब के लिये उसका भूखा पेट ही उसका सब कुछ है। गरीबी ने उनकी सारी इच्छाएँ उनकी पेट पर ही केंद्रित कर दी है इसलिए जब वह कफ़न के लिए मिले पैसो की मदिरा पीते है तो उसको भी सही बताते है और अंत में एक भिखारी को भोजन करा के मरी हुयी बहु का श्राध भी कर देते है। गुलज़ार जी ने कुछ वर्ष पहले दूरदर्शन पर प्रेमचंद जी की कहानियो को लेकर एक धारावाहिक प्रसारित किया था जिसका नाम था "तहरीर", उसमे यह कहानी भी दिखाई गयी थी जिसको आप नीचे देख सकते है।  इस कहानी पर वर्ष २००५ में एक हिंदी फिल्म भी बनायीं गयी थी Forgotten Showers ( भूली हुयी बारिश) जिसके निर्देशक विनोद कुमार थे और जिसमे राजपाल यादव ने बहुत ही अच्छा अभिनय किया था।  उम्मीद है आपको यह कहानी अवश्य पसंद आएगी।

Bashir Badr - Parakhna Mat, Parakhne Mein Koi Apna Nahi Rahta | बशीर बद्र - परखना मत, परखने में कोई अपना नहीं रहता | Ghazal

परखना मत, परखने में कोई अपना नहीं रहता
किसी भी आईने में देर तक चेहरा नहीं रहता

Chandradhar Sharma 'Guleri' - Ghantaghar | चंद्रधर शर्मा 'गुलेरी' - घंटाघर | Story

एक मनुष्य को कहीं जाना था। उसने अपने पैरों से उपजाऊ भूमि को बंध्या करके पगडंडी काटी और वह वहाँ पर पहला पहुँचने वाला हुआ। दूसरे, तीसरे और चौथे ने वास्तव में उस पगडंडी को चौड़ी किया और कुछ वर्षों तक यों ही लगातार जाते रहने से वह पगडंडी चौड़ा राजमार्ग बन गई, उस पर पत्थर या संगमरमर तक बिछा दिया गया, और कभी-कभी उस पर छिड़काव भी होने लगा।

Saadat Hasan Manto - Khol Do | सआदत हसन मंटो - खोल दो | Story

सआदत हसन मंटो अपने समय में हमेशा विवादों में रहे, भारत और पाकिस्तान में कई मुकदमें चलते रहे, और चलते भी क्यों न? कहानियों के माध्यम से नंगा सच दिखाने का साहस जो किया था। अपने समय से कहीं आगे की कहानियाँ लिख जो दी थी।  यह अलग बात है की इन्ही कहानियो की वजह से 'मंटो' आज विश्व प्रसिद्ध कहानीकार है किन्तु अपने समय में वह सम्मान नहीं पा सके।  हिंदी कला आपके लिए प्रस्तुत कर रहे है 'मंटो' की सबसे विवादस्पद कहानियों  में से एक "खोल दो"

Sahir Ludhianvi - Maine Jo Geet Tere Pyaar Ki Khatir Likhe | साहिर लुधियानवी - मैंने जो गीत तेरे प्यार की ख़ातिर लिक्खे | Poetry

साहिर लुधियानवी - मैंने जो गीत तेरे प्यार की ख़ातिर लिक्खे
मैंने जो गीत तेरे प्यार की ख़ातिर लिक्खे
आज उन गीतों को बाज़ार में ले आया हूँ

Bhisham Sahni - Oh Haramjade | भीष्म साहनी - ओ हरामजादे | Story

भीष्म साहनी जी की यह कहानी मेरी सबसे पसंदीदा कहानियो में से है।  कहानी क्या है? या यूँ कहिये कहानीकार ने परदेश में बसने वाले भारतीयों के दिल की टीस को उतारकर कागज़ पर लिख दिया है। मुझे लगता है यह कहानी भीष्म साहनी जी के कोई असली अनुभव की झलक है क्योंकि कहानी में भी उन्होंने खुद को ही कहानी के मुख्य पात्र के साथ संवाद करते हुए दिखाया है। हिन्दी कला आपके लिए प्रस्तुत करते है "ओ हरामजादे"

Harishankar Parsai - Apni Apni Beemari | हरिशंकर परसाई - अपनी अपनी बीमारी | Vyangya

हम उनके पास चंदा माँगने गए थे। चंदे के पुराने अभ्यासी का चेहरा बोलता है। वे हमें भाँप गए। हम भी उन्हें भाँप गए। चंदा माँगनेवाले और देने वाले एक-दूसरे के शरीर की गंध बखूबी पहचानते हैं। लेनेवाला गंध से जान लेता है कि यह देगा या नहीं। देनेवाला भी माँगनेवाले के शरीर की गंध से समझ लेता है कि यह बिना लिए टल जाएगा या नहीं। हमें बैठते ही समझ में आ गया कि ये नहीं देंगे। वे भी शायद समझ गए कि ये टल जाएँगे। फिर भी हम दोनों पक्षों को अपना कर्तव्य तो निभाना ही था। हमने प्रार्थना की तो वे बोले - आपको चंदे की पड़ी है, हम तो टैक्सों के मारे मर रहे हैं। सोचा, यह टैक्स की बीमारी कैसी होती है। बीमारियाँ बहुत देखी हैं - निमोनिया, कालरा, कैंसर; जिनसे लोग मरते हैं। मगर यह टैक्स की कैसी बीमारी है जिससे वे मर रहे थे! वे पूरी तरह से स्वस्थ और प्रसन्न थे। तो क्या इस बीमारी में मजा आता है ? यह अच्छी लगती है जिससे बीमार तगड़ा हो जाता है। इस बीमारी से मरने में कैसा लगता होगा ?

Amritlal Nagar - Prayashchit | अमृतलाल नागर - प्रायश्चित | Story

अमृतलाल नागर जी की यह कहानी उस समय के भारतीय जनमानस के पिछड़ी सोच पर एक प्रहार करती है और आने वाले समय में युवा सोच की नयी विचारधारा को उजागर करती है। साथ ही साथ समाज में हो रहे स्त्रिओ पर हो रहे अत्याचारों पर भी प्रकाश डालने का प्रयास करती है। 'हिन्दी कला' आपके लिए प्रस्तुत करते है "प्रायश्चित"

Kaifi Azmi - Haath Aakar Laga Gaya Koi | कैफ़ी आज़मी - हाथ आकर लगा गया कोई | Ghazal

हाथ आकर लगा गया, गया कोई ।
मेरा छप्पर उठा गया कोई ।

Premchand - Algyojha | प्रेमचंद - अलग्योझा | Story


प्रेमचंद जी की कहानियाँ जब पढ़ता हूँ तो यकीन मानिये लगता ही नहीं की कोई कहानी पढ़ रहा हूँ, ऐसा लगता है सब कुछ मेरे सामने घटित हो रहा है और मैं बस देखे जा रहा हूँ।  आप जब प्रेमचंद जी की कहानी पढ़ते है तो लगता है कि लेखक ने जरूर इतना सजीव चित्रण सिर्फ अपनी कल्पना से नहीं किया होगा, जरूर लेखक ने कहीं न कहीं वह जीवन करीब से देखा है और जिया है।  इस कहानी का एक-एक दृश्य और एक-एक संवाद ऐसा लगता है प्रेमचंद जी ने अपनी आखों से देखा और सुना है। हालांकि प्रेमचंद जी अपनी रचनाओ में दुःखान्त के लिए प्रसिद्ध रहे है अपितु इस कहानी में उन्होंने सुखांत को अपनाया है। गृहकलेश और बंटवारे को दर्शाती उनकी यह कहानी हिन्दी साहित्य के लिए अमूल्य धरोहर है जिसे हम आपके सामने प्रस्तुत कर रहे है।

Deendayal Sharma - Papa Jhooth Nahi Bolte | दीनदयाल शर्मा - पापा झूठ नहीं बोलते | Short Story

मां-बाप की इकलौती बेटी सुरभि। उम्र लगभग ग्यारह साल। कद चार फुट, चेहरा गोल, आंखें बड़ी-बड़ी, रंग गोरा-चिट्टïआ, बॉब कट बाल, स्वभाव से चंचल एवं बातूनी।

सुरभि के पापा एक सरकारी स्कूल में अध्यापक हैं और उसकी मम्मी एक प्राइवेट स्कूल में अध्यापिका। छोटा सा परिवार और छोटा सा घर।

सुरभि पांचवीं कक्षा में पढ़ती है। पढऩे के साथ-साथ चित्रकारी करना, डॉस करना, पहेलियां बूझना, टीवी देखना, कहानियां सुनना और अपने पापा से नई नई बातें जानना उसका शौक है।

Chandradhar Sharma 'Guleri' - Usne Kaha Tha | चन्द्रधर शर्मा 'गुलेरी' - उसने कहा था | Story

हिन्दी कथाजगत में चन्द्रधर शर्मा गुलेरी एक ऐसे कथाकार हुए जो कुछ ही कहानियां लिखकर अमर हो गए। उनकी कहानियां आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी अपने समय में रहीं। कथा साहित्य को गुलेरी जी ने नई दिशा और आयाम प्रदान किए। वह उच्च कोटि के निबंधकार और प्रखर समालोचक भी थे। पं. चंद्रधर शर्मा गुलेरी ने “उसने कहा था” कहानी की रचना कर न केवल हिंदी कहानी अपितु विश्व कथा-साहित्य को समॄद्ध किया हैं । वास्तविकता यह है कि उनकी प्रसिद्धि “”उसने कहा था”” के द्वारा ही हुई। “उसने कहा था” प्रेम, शौर्य और बलिदान की अद्भुत प्रेम-कथा है। प्रथम विश्व युद्ध के समय में लिखी गयी यह प्रेम कथा कई मायनों में अप्रतिम है। इसी कहानी और इसके शीर्षक को ले हिन्दी भाषा की एक फ़िल्म है जो 1960 में प्रदर्शित हुई। जिसके प्रमुख कलाकार सुनील दत्त, नन्दा और राजेन्द्रनाथ थे। वातावरण का अत्यंत गहरे रंगों में सृजन गुलेरी जी की अपनी विशेषता है। कहानी का प्रारंभ अमृतसर की भीड-भरी सडकों और गहमागहमी से होता है, युद्ध के मोर्चे पर खाली पडे फौजी घर, खंदक का वातावरण, युद्ध के पैंतरे इन सबके चित्र अंकित करता हुआ कहानीकार इस स्वाभाविक रूप में वातावरण की सृष्टि करता है कि वह हमारी चेतना, संवेदना का अंग ही बन जाता है। 'हिन्दी कला' आपके सामने प्रस्तुत करते है हिन्दी साहित्य की इस कालजयी अमर कहानी को जिसका नाम है "उसने कहा था"

Gulzar - Pyaar Woh Beez Hai | गुलज़ार - प्यार वो बीज है | | Poetry


प्यार कभी इकतरफ़ा होता है, न होगा 
दो रूहों के मिलन की जुड़वां पैदाईश है ये
प्यार अकेला नहीं जी सकता 
जीता है तो दो लोगों में
मरता है तो दो मरते हैं

Sudarshan - Andhkaar | सुदर्शन - अंधकार | Story

हिन्दी के प्रसिद्ध लेखक सुदर्शन जी की यह कहानी पुत्र लोभ की आकांक्षा लिए हुए एक ऐसे परिवार की है जहाँ स्त्रियों का सम्मान इस बात पर निर्भर है की वह पुत्र आकांक्षा को पूर्ण कर पाती है या नहीं। यह कहानी आपके मन को झंझोर कर रख देती है।

Saadat Hasan Manto - Toba TekSingh | सआदत हसन मंटो - टोबा टेकसिंह | Story

सआदत हसन मंटो की कहानिया कभी लगता है कहानियां नहीं एक तीखा, दिल को चीर देना वाला व्यंग्य है, जो सवाल करता है उस समय के राजनेताओ से कि क्या हासिल हुआ बंटवारा करके? उस सारे जूनून में कितनो ने अपनों को खोया और कितनो ने अपनी जान खोयी। इस कहानी में जो एक पागल के माध्यम से सआदत ने जो अपनी बात रखी है वह तारीफ़ के काबिल है।

Ilachandra Joshi - Rail Ki Raat | इलाचन्द्र जोशी - रेल की रात | Story

गाड़ी आने के समय से बहुत पहले ही महेंद्र स्टेशन पर जा पहुँचा था। गाड़ी के पहुँचने का ठीक समय मालूम न हो, यह बात नहीं कही जा सकती। जिस छोटे शहर में वह आया हुआ था, वहाँ से जल्दी भागने के लिए वह ऐसा उत्सुक हो उठा था कि जान-बूझ कर भी अज्ञात मन से शायद किसी अबोध बालक की तरह वह समझा था कि उसके जल्दी स्टेशन पर पहुँचने से संभवत: गाड़ी भी नियत समय से पहले ही आ जायगी।

Harivansh Rai Bachchan - Agneepath | हरिवंश राय बच्चन - अग्निपथ | Poetry

हरिवंश राय बच्चन जी की यह कविता ज़िंदगी के मुश्किल से मुश्किल समय में भी एक प्रेरणा देती रहती है।  इस कविता को उनके बेटे अमिताभ बच्चन की फिल्म अग्निपथ (१९९०) में उपयोग किया गया है जो उस फिल्म की कहानी पर बिलकुल खरी उतरती है।  इसके बाद साल २०१२ में इस फिल्म के रीमेक में भी इस कविता का इस्तेमाल किया गया है।  

Munawwar Rana - Jab Bhi Kashti Meri Sailaab Mein Aa Jati Hai | मुनव्वर राना - जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है | Ghazal

जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है
माँ दुआ करती हुई ख़्वाब में आ जाती है

Gulzar - Takseem | गुलजार - तक़सीम | Story

भारत-पाकिस्तान विभाजन का दर्द जिन्होंने महसूस किया होगा उसको शब्दों में बयान करना बड़ा मुश्किल है। यूँ तो उस दौरान हुए दंगो और मारकाट पर बहुत कहानिया है पर उन घटनाओ ने उन लोगो पर क्या असर छोड़ा उसको दर्शाती यह गुलज़ार साब की कहानी जो उन्होंने उर्दू में लिखी थी उसका अनुवाद जो शम्भू यादव ने किया है यहाँ प्रस्तुत है।

Premchand - Ghaaswali | प्रेमचंद - घासवाली | Story

ग्रामीण जीवन का जो जीवंत चित्रण प्रेमचंद अपनी कहानियो में करते है उसके निकट शायद ही कोई कहानीकार पहुंच पाया है।  उन्होंने अपनी कहानियो में ग्रामीण जीवन के हर पहलु को छुआ है। यह कहानी नीची जाति की एक लड़की के उँचे विचारो की है और उसके द्वारा एक युवक के जीवन परिवर्तन की है। हिन्दी कला आपके सामने प्रस्तुत करते है प्रेमचंद जी की कहानी 'घासवाली', कहानी पर अपनी टिप्पणी अवश्य करे।  

Harishankar Parsai - Pitne Pitne Mein Fark | हरिशंकर परसाई - पिटने-पिटने में फर्क | Vyangya

हरिशंकर परसाई हिंदी के सबसे प्रसिद्ध व्यंग्यकारों में से है। व्यंग्य की जब बात आई है तो वह अपनी ही लेख़क बिरादरी के लोगो की भी खिचांई करने से पीछे नहीं रहे है।  उनके इस 'पिटने-पिटने में फर्क' व्यंग्य में उन्होंने जो अन्य लेखको पर निशाना साधा है वह प्रशंसनीय है।  आपके लिए प्रस्तुत है उनका यह व्यंग:

Saadat Hasan Manto - Boo | सआदत हसन मंटो - बू | Story

सआदत हसन मंटो जो अपनी रचनाओ के कारण हमेशा विवादों में रहे लेकिन बाद में अपनी उन्ही रचनाओ के लिए सबसे मशहूर भी, उनकी यह कहानी 'बू' मंटो की सबसे चर्चित कहानियो में से एक है।  कहानी की भाषा और दृश्य इसे विवादस्पद तो बनाते है पर अंत में जो कहानी जो आपके ऊपर एक प्रभाव डाल के जाती है वह भी देखने लायक होता है। हिन्दी कला प्रस्तुत करती है आपके के लिए मंटो की चर्चित कहानी 'बू'

Sarveshwar Dayal Saxena - Safed Gudd | सर्वेश्वरदयाल सक्सेना - सफेद गुड़ | Short Story

दुकान पर सफेद गुड़ रखा था। दुर्लभ था। उसे देखकर बार-बार उसके मुँह से पानी आ जाता था। आते-जाते वह ललचाई नजरों से गुड़ की ओर देखता, फिर मन मसोसकर रह जाता।

आखिरकार उसने हिम्मत की और घर जाकर माँ से कहा। माँ बैठी फटे कपड़े सिल रही थी। उसने आँख उठाकर कुछ देर दीन दृष्टि से उसकी ओर देखा, फिर ऊपर आसमान की ओर देखने लगी और बड़ी देर तक देखती रही। बोली कुछ नहीं। वह चुपचाप माँ के पास से चला गया। जब माँ के पास पैसे नहीं होते तो वह इसी तरह देखती थी। वह यह जानता था।

Premchand - Eidgah | प्रेमचंद - ईदगाह | Story

ठीक से याद नहीं पर शायद कक्षा चौथी या पांचवी में यह कहानी पहली बार अपनी हिंदी पुस्तक में पढ़ी थी और तब से ही दिल में घर कर गयी थी।  आज भी ईद आती है तो इस कहानी की याद अपने आप आ जाती है।  प्रेमचंद की यह कहानी मैं बाल साहित्य के करीब भी पाता हूँ और साथ ही उत्तम हिंदी साहित्य के, बच्चों की हरकतों और मेले का महीन विवरण और साथ ही एक छोटे से बच्चे का अपनी दादी के प्रति असीम प्रेम इस कहानी को कालजयी बनाता है। 

Agyeya - Indu Ki Beti | अज्ञेय - इन्दु की बेटी | Story

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन "अज्ञेय" हिन्दी साहित्य के प्रमुख रचनाकारों में से जाने जाते है।  हिंदी साहित्य के 'नई कविता' और 'प्रयोग' आंदोलन के प्रमुख रचनाकार है।  उनकी यह कहानी मानव हृदय के उन पहलुओ को उजागर करती है जो वो किसी से कह नहीं पाता।

Kavita Verma - Aisa Bhi Hota Hai | कविता वर्मा - ऐसा भी होता है | Short Story

गली के नुक्कड़ पर जब से पान की दुकान खुली है मोहल्ले के लड़कों को ठिया मिल गया। सुबह से शाम तक मज़मा लगा रहता ,बातें और ठहाके गूंजते रहते। हालांकि किसी ने कोई ऐसी वैसी बात या हरकत नहीं की थी लेकिन फिर भी लड़कियाँ और औरतें वहाँ से गुज़रते हुए सिर और नज़रें झुका लेतीं। मोहल्ले के बड़े बूढ़े उनकी हँसी पर कुढ़ते रहते।

Sharad Joshi - Hum Jiske Mama Hai | शरद जोशी - जिसके हम मामा हैं | Vyangya

शरद जोशी का व्यंग्य करने का तरीका मुझे बेहद प्रिय है।  जितनी आसानी से वह कटाक्ष करते है वह देखने लायक होता है।  इस व्यंग्य में जिस आसानी से एक छोटी सी कहानी के माध्यम से उन्होंने राजनीती और और नेताओ पर जो निशाना साधा है वो देखते ही बनता है।

Vishnu Sharma - Akalmand Hans | विष्णु शर्मा - अक़्लमंद हंस | Moral Story

ईसा से लगभग दो सौ तीन सौ वर्ष पूर्व पंडित विष्णु शर्मा ने पंचतंत्र की इन कहानियों को गढा था। इन कहानियों के जरिए उन्होंने एक राजा के तीन बिगडे बेटों को सही राह दिखाई थी। उन्होंने अपनी बातें पशु-पक्षियों के मुख से रोचक तरीके से कहलवाई। वही उनकी कहानी के पात्र थे। पशु-पक्षियों को आधार बनाकर उन्होंने राजकुमारों को उचित-अनुचित की शिक्षा दी। उनकी शिक्षा समाप्त होने के बाद पंडित विष्णु शर्मा ने इन कहानियों को पंचतंत्र की कहानियों के रूप में संकलित किया।

Saadat Hasan Manto - Titwaal Ka Kutta | सआदत हसन मंटो - टिटवाल का कुत्ता | Story

भारत - पाकिस्तान के बटवारे को लेकर पीड़ा का दर्शाती  जितनी प्रासंगिक कहानिया मंटो ने लिखी है शायद किसी ने भी नहीं लिखी। उनकी कहानियां जैसे 'खोल दो', 'ठंडा गोश्त' बंटवारे के दर्द को बयान करती है। यह कहानी बटवारे का दर्द तो बयान करती ही है साथ साथ एक व्यंग्यात्मक प्रस्तुति भी है जो दोनों देशो के राजनेताओ और लोगो की मानसिकताओं पर एक कटाक्ष करती है।

Phanishwar Nath 'Renu' - Thess | फणीश्वरनाथ रेणु - ठेस | Story

फणीश्वरनाथ रेणु जी हिंदी साहित्य में प्रेमचंद जी के बाद सबसे सफल कहानीकारों में से है।  प्रेमचंद जी ही 'गोदान' के बाद रेणु जी का 'मैला आँचल' हिंदी के सर्वश्रेष्ठ उपन्यासों में से एक है। उनकी यह कहानी एक छोटे से गाँव के छोटी जाती के उस बड़े हृदय वाले कारीगर की है जो अंत में आपके हृदय में अपनी छाप छोड़ जाता है।  

Sudarshan - Haar Ki Jeet | सुदर्शन - हार की जीत | Story

सुदर्शन  - हार की जीत
यह कहानी बचपन में अपनी हिंदी की पुस्तक में पढ़ी थी पहली बार, और पहली बार ही ह्रदय को स्पर्श कर गयी थी। कहानी की जो सीख है वह आपके साथ बैठ जाती है और आपके साथ हमेशा चलती है, शायद इसीलिए कहानी ही सबसे सशक्त माध्यम है अपनी  बात रखने का।  सुदर्शन जी की यह कहानी है बुराई पर अच्छाई की और ह्रदय परिवर्तन की, यदि आपने अभी तक इस कहानी को नहीं पढ़ा है तो अवश्य पढे।

Gulzar - Dhuan | गुलजार - धुआँ | Story

गुलज़ार साब नें यूँ तो अपनी नज़्मों, ग़ज़लों, गीतों और कविताओ से जो हमारे दिल में जगह बनायीं है वो अतुलनीय है।  गुलज़ार साब ने हिंदी साहित्य को कुछ अदभुत कहानियाँ भी दी है।  'धुआँ' मेरी उन्ही कुछ अदभुत पसंदीदा कहानियों में से है जो मानव ह्रदय के उन पहलुओ को उजागर करती है जो हमारे खुद के धर्म और समाज के नाम पर बनाये हुए है। आपके लिए प्रस्तुत है गुलज़ार साब की कहानी "धुआँ"

Saadat Hasan Manto - 5 Short Stories | सआदत हसन मंटो - पांच लघु कथाये | Short Story

सआदत हसन मंटो की कहानियों की जितनी चर्चा बीते दशक में हुई है उतनी शायद उर्दू और हिंदी और शायद दुनिया के दूसरी भाषाओं के कहानीकारों की कम ही हुई है। मंटो ने केवल एक ही उपन्यास लिखा फिर भी उन्हें दुनिया के बेहतरीन कथाकारो में शामिल किया जाता है क्योंकि उन्होंने वो जगह अपनी कहानियों के दम पर ही बना ली है। उनकी सबसे प्रसिद्द कहानियो में 'ठंडा गोश्त', 'टोबा टेक सिंह', 'बू' और 'खोल दो' शामिल है। हिंदी कला आपके लिए यहाँ उनकी कुछ चुनी हुयी पांच लघु कथाएँ प्रस्तुत कर रहा है।  अपने विचार और सुझाव आप हमे नीचे कमेंट बॉक्स में दे सकते है।

Mohan Rakesh - Mawali | मोहन राकेश - मवाली | Story

मोहन राकेश हिंदी भाषा के 'नयी कहानी' आंदोलन के अग्रणी रचनाकार है।  उनकी यह कहानी 'मवाली' पढ़कर आपको भी पता चल जायेगा कि क्यों मोहन राकेश जी को हिंदी साहित्य में इतनी सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है।  कहानी का चित्रण ऐसा है की आपको लगने लगता  है की कहानी की घटनाये आपकी आँखों के सामने घटित हो रही है। 

Premchand - Do Bailo Ki Katha | प्रेमचंद - दो बैलों की कथा | Story

वैसे तो मुझे प्रेमचंद की हर रचना प्रिय है अपितु यह कहानी बहुत पसंद है।  गाँव की सादगी भरा जीवन और जानवरो के बीच के स्नेह का जो मनोरंजक चित्रण है वह हृदय को स्पर्श कर जाता है।  

Shrilal Shukla - Ek Chor Ki Kahani | श्रीलाल शुक्ल- एक चोर की कहानी | Story

पद्मभूषण एवं ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित श्रीलाल शुक्ल जी की यह कहानी मुझे अत्यंत प्रिय है। यह कहानी एक चोर की है जिसे कुछ गाँव वाले पकड़ लेते है और कैसे कैसे मोड़ लेते हुए कहानी अपने अंत तक पहुचती है और आपको सोचने पर मजबूर कर देती है।

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Gulzar - Poore Ka Poora Aakash Ghuma Kar Baazi Dekhi Maine | गुलज़ार - पूरे का पूरा आकाश घुमा कर बाज़ी देखी मैने | Poem

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गुलज़ार साब की यह कविता मुझे बेहद पसंद है, इसमें जिस तरह से गुलज़ार साब और भगवान के बीच जिसे वो ‘बड़े मियां’ कहते है, उनके साथ की शतरंज की ...
Shakeel Badayuni - Badle Badle Mere Sarkaar Nazar Aate Hai | शकील बदायूँनी - बदले बदले मेरे सरकर नज़र आते हैं | Ghazal

Shakeel Badayuni - Badle Badle Mere Sarkaar Nazar Aate Hai | शकील बदायूँनी - बदले बदले मेरे सरकर नज़र आते हैं | Ghazal

शकील  बदायूँनी  की बदले बदले मेरे सरका र नज़र आते हैं  बदले बदले मेरे सरकार नज़र आते हैं । घर की बरबादी के आसार नज़र आते हैं ।
Wasim Barelvi - Mohabbat Ke Dino Ki Yahi Kharabi hai | वसीम बरेलवी - मुहब्बतों के दिनों की यही ख़राबी है | Ghazal

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वसीम बरेलवी का नाम ग़ज़ल की दुनिया में किसी परिचय का मोहताज़ नहीं है। उनकी दिल को छूती ग़ज़लें ही उनका परिचय है। वसीम साहब बरेली (उत्तर प्रदे...

Premchand - Poos Ki Raat | प्रेमचंद - पूस की रात | Story

समाचार में जब देखा कि एक राजनीतिक रैली में एक किसान ने आत्महत्या कर ली और सभी मूकदर्शक बने देखते रहे और अब उसकी मौत के बाद भी उस गरीब क...

Saadat Hasan Manto - Khuda Ki Kasam | सआदत हसन मंटो - खुदा की कसम | Story

जब भी मंटो की कहानियो को पढता हूँ तो लगता है शायद मंटो ने यह सब बहुत करीब से देखा और महसूस किया होगा क्योंकि सिर्फ परिकल्पना से कोई इतना...

Ismat Chughtai - Bhabhi | इस्मत चुग़ताई - भाभी | Story

इस्मत चुग़ताई जी उर्दू की बहुत ही उम्दा लेखक रही है और उन कुछ मुस्लिम लेखको में से है जिन्होंने बंटवारे के बाद हिंदुस्तान में रहने का फै...

Premchand - Kafan | प्रेमचंद - कफ़न | Story

प्रेमचंद जी की यह कहानी आज भी हमारे देश के भुलाये गए गरीब तबके के उन तमाम लोगो की स्तिथि बयान करती है जो समाज की ढकोसली परम्पराओ का वहन...

Bashir Badr - Parakhna Mat, Parakhne Mein Koi Apna Nahi Rahta | बशीर बद्र - परखना मत, परखने में कोई अपना नहीं रहता | Ghazal

परखना मत, परखने में कोई अपना नहीं रहता किसी भी आईने में देर तक चेहरा नहीं रहता

Chandradhar Sharma 'Guleri' - Ghantaghar | चंद्रधर शर्मा 'गुलेरी' - घंटाघर | Story

एक मनुष्य को कहीं जाना था। उसने अपने पैरों से उपजाऊ भूमि को बंध्या करके पगडंडी काटी और वह वहाँ पर पहला पहुँचने वाला हुआ। दूसरे, तीसरे और...

Saadat Hasan Manto - Khol Do | सआदत हसन मंटो - खोल दो | Story

सआदत हसन मंटो अपने समय में हमेशा विवादों में रहे, भारत और पाकिस्तान में कई मुकदमें चलते रहे, और चलते भी क्यों न? कहानियों के माध्यम से न...

Bhisham Sahni - Oh Haramjade | भीष्म साहनी - ओ हरामजादे | Story

भीष्म साहनी जी की यह कहानी मेरी सबसे पसंदीदा कहानियो में से है।  कहानी क्या है? या यूँ कहिये कहानीकार ने परदेश में बसने वाले भारतीयों क...

Harishankar Parsai - Apni Apni Beemari | हरिशंकर परसाई - अपनी अपनी बीमारी | Vyangya

हम उनके पास चंदा माँगने गए थे। चंदे के पुराने अभ्यासी का चेहरा बोलता है। वे हमें भाँप गए। हम भी उन्हें भाँप गए। चंदा माँगनेवाले और देने ...

Premchand - Algyojha | प्रेमचंद - अलग्योझा | Story

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Deendayal Sharma - Papa Jhooth Nahi Bolte | दीनदयाल शर्मा - पापा झूठ नहीं बोलते | Short Story

मां-बाप की इकलौती बेटी सुरभि। उम्र लगभग ग्यारह साल। कद चार फुट, चेहरा गोल, आंखें बड़ी-बड़ी, रंग गोरा-चिट्टïआ, बॉब कट बाल, स्वभाव से चंचल...

Chandradhar Sharma 'Guleri' - Usne Kaha Tha | चन्द्रधर शर्मा 'गुलेरी' - उसने कहा था | Story

हिन्दी कथाजगत में चन्द्रधर शर्मा गुलेरी एक ऐसे कथाकार हुए जो कुछ ही कहानियां लिखकर अमर हो गए। उनकी कहानियां आज भी उतनी ही प्रासंगिक ...

Gulzar - Pyaar Woh Beez Hai | गुलज़ार - प्यार वो बीज है | | Poetry

प्यार कभी इकतरफ़ा होता है, न होगा  दो रूहों के मिलन की जुड़वां पैदाईश है ये प्यार अकेला नहीं जी सकता   जीता है तो दो लोगों में ...

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हरिवंश राय बच्चन जी की यह कविता ज़िंदगी के मुश्किल से मुश्किल समय में भी एक प्रेरणा देती रहती है।  इस कविता को उनके बेटे अमिताभ बच्चन क...

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जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है माँ दुआ करती हुई ख़्वाब में आ जाती है

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Kavita Verma - Aisa Bhi Hota Hai | कविता वर्मा - ऐसा भी होता है | Short Story

गली के नुक्कड़ पर जब से पान की दुकान खुली है मोहल्ले के लड़कों को ठिया मिल गया। सुबह से शाम तक मज़मा लगा रहता ,बातें और ठहाके गूंजते रहत...

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गुलज़ार साब नें यूँ तो अपनी नज़्मों, ग़ज़लों, गीतों और कविताओ से जो हमारे दिल में जगह बनायीं है वो अतुलनीय है।  गुलज़ार साब ने हिंदी साहित्य ...

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