हिन्दी साहित्य को सम्मानित करने की कोशिश में एक छोटा सा प्रयास, हिन्दी की श्रेठ कविताओं, ग़ज़लों, कहानियों एवं अन्य लेखों को एक स्थान पर संकलित करने की छोटी सी कोशिश...

Gulzar - Poore Ka Poora Aakash Ghuma Kar Baazi Dekhi Maine | गुलज़ार - पूरे का पूरा आकाश घुमा कर बाज़ी देखी मैने | Poem

गुलज़ार साब की यह कविता मुझे बेहद पसंद है, इसमें जिस तरह से गुलज़ार साब और भगवान के बीच जिसे वो ‘बड़े मियां’ कहते है, उनके साथ की शतरंज की बाज़ी का चित्रण है वह बहुत ही रोमांचक है। कविता के साथ साथ यह हम मनुष्यों के संघर्ष की भी कहानी है कि कैसे हमने आग की खोज की फिर उसके बाद आज चाँद तक भी पहुंच गए है।  अपने विचार इस कविता के बारे में नीचे कमेंट बॉक्स में अवश्य शेयर करे।  धन्यवाद ! 

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