हिन्दी साहित्य को सम्मानित करने की कोशिश में एक छोटा सा प्रयास, हिन्दी की श्रेठ कविताओं, ग़ज़लों, कहानियों एवं अन्य लेखों को एक स्थान पर संकलित करने की छोटी सी कोशिश...

Gulzar - Poore Ka Poora Aakash Ghuma Kar Baazi Dekhi Maine | गुलज़ार - पूरे का पूरा आकाश घुमा कर बाज़ी देखी मैने | Poem

गुलज़ार साब की यह कविता मुझे बेहद पसंद है, इसमें जिस तरह से गुलज़ार साब और भगवान के बीच जिसे वो ‘बड़े मियां’ कहते है, उनके साथ की शतरंज की बाज़ी का चित्रण है वह बहुत ही रोमांचक है। कविता के साथ साथ यह हम मनुष्यों के संघर्ष की भी कहानी है कि कैसे हमने आग की खोज की फिर उसके बाद आज चाँद तक भी पहुंच गए है।  अपने विचार इस कविता के बारे में नीचे कमेंट बॉक्स में अवश्य शेयर करे।  धन्यवाद ! 

Poore Ka Poora Aakash Ghuma Kar Baazi Dekhi Maine Poem by Gulzar

पूरे का पूरा आकाश घुमा कर बाज़ी देखी मैने,
पूरे का पूरा आकाश घुमा कर बाज़ी देखी मैने

काले घर में सूरज चलके, तुमने शायद सोचा था
मेरे सब मोहरे पिट जायेंगे.
मैने एक चराग जलाकर रोशनी कर ली,
अपना रस्ता खोल लिया

तुमने एक समन्दर हाथ में लेकर मुझपे ढेल दिया,
मैने नोह की कश्ति उस के ऊपर रख दी

काल चला तुमने और मेरी जानिब देखा,
काल चला तुमने और मेरी जानिब देखा
मैने काल को तोड़कर,
लम्हा लम्हा जीना सीख लिया

मेरी खुदी को मारना चाहा
तुमने चन्द चमत्कारों से
मेरी खुदी को मारना चाहा तुमने
चन्द चमत्कारों से
और मेरे एक प्यादे ने चलते चलते
तेरा चांद का मोहरा मार लिया

मौत की शह देकर तुमने समझा था अब तो मात हुई, 
मौत की शह देकर तुमने समझा था अब तो मात हुई
मैने जिस्म का खोल उतारकर सौंप दिया,
और रूह बचा ली

पूरे का पूरा आकाश घुमा कर अब
तुम देखो बाज़ी...
गुलज़ार
*****************************************************************

Poore Ka Poora Aakash Ghuma Kar Baazi Dekhi Main Poem by Gulzar in Roman Transcript


Poore Ka Poora Aakash Ghuma Kar Baazi Dekhi Maine,
Poore Ka Poora Aakash Ghuma Kar Baazi Dekhi Maine,

Kaale Ghar Mein Sooraj Chal Ke, Tumne Shayad Socha Tha
Mere Sab Mohre Pit Jayege
Maine Ek Chirag Jalakar Roshni Kar Li,
Apna Rasta Khol Liya

Tumne Ek Samandar Haath Mein Lekar Mujhpe Dhel Diya,
Maine Noh Ki Kashti Us Ke Upar Rakh Di,

Kaal Chala Tumne Aur Meri Janib Dekha,
Kaal Chala Tumne Aur Meri Janib Dekha
Maine Kaal Ko Todkar,
Lamha Lamha Jeena Seekh Liya

Meri Khudi Ko Maarna Chaha
Tumne Chand Chamatkaro Se
Meri Ka Maarna Chaha Tumne 
Chand Chamatkaro Se
Aur Mere Ek Pyaade Ne Chalte Chalte
Tera Chaand Ka Mohra Maar Liya

Maut Ki Shay Dekar Tumne Samjha Tha Ab To Maat Huyi,
Maut Ki Shay Dekar Tumne Samjha Tha Ab To Maat Huyi
Maine Jism Ka Khol Utaarkar Saup Diya, 
Aur Rooh Bacha Li 

Poore Ka Poora Aakash Ghuma Kar Ab
Tum Dekho Baazi...
- Gulzar

Popular Posts

Gulzar - Poore Ka Poora Aakash Ghuma Kar Baazi Dekhi Maine | गुलज़ार - पूरे का पूरा आकाश घुमा कर बाज़ी देखी मैने | Poem

गुलज़ार साब की यह कविता मुझे बेहद पसंद है, इसमें जिस तरह से गुलज़ार साब और भगवान के बीच जिसे वो ‘बड़े मियां’ कहते है, उनके साथ की शतरंज की बाज़ी का चित्रण है वह बहुत ही रोमांचक है। कविता के साथ साथ यह हम मनुष्यों के संघर्ष की भी कहानी है कि कैसे हमने आग की खोज की फिर उसके बाद आज चाँद तक भी पहुंच गए है।  अपने विचार इस कविता के बारे में नीचे कमेंट बॉक्स में अवश्य शेयर करे।  धन्यवाद ! 

Poore Ka Poora Aakash Ghuma Kar Baazi Dekhi Maine Poem by Gulzar

पूरे का पूरा आकाश घुमा कर बाज़ी देखी मैने,
पूरे का पूरा आकाश घुमा कर बाज़ी देखी मैने

काले घर में सूरज चलके, तुमने शायद सोचा था
मेरे सब मोहरे पिट जायेंगे.
मैने एक चराग जलाकर रोशनी कर ली,
अपना रस्ता खोल लिया

तुमने एक समन्दर हाथ में लेकर मुझपे ढेल दिया,
मैने नोह की कश्ति उस के ऊपर रख दी

काल चला तुमने और मेरी जानिब देखा,
काल चला तुमने और मेरी जानिब देखा
मैने काल को तोड़कर,
लम्हा लम्हा जीना सीख लिया

मेरी खुदी को मारना चाहा
तुमने चन्द चमत्कारों से
मेरी खुदी को मारना चाहा तुमने
चन्द चमत्कारों से
और मेरे एक प्यादे ने चलते चलते
तेरा चांद का मोहरा मार लिया

मौत की शह देकर तुमने समझा था अब तो मात हुई, 
मौत की शह देकर तुमने समझा था अब तो मात हुई
मैने जिस्म का खोल उतारकर सौंप दिया,
और रूह बचा ली

पूरे का पूरा आकाश घुमा कर अब
तुम देखो बाज़ी...
गुलज़ार
*****************************************************************

Poore Ka Poora Aakash Ghuma Kar Baazi Dekhi Main Poem by Gulzar in Roman Transcript


Poore Ka Poora Aakash Ghuma Kar Baazi Dekhi Maine,
Poore Ka Poora Aakash Ghuma Kar Baazi Dekhi Maine,

Kaale Ghar Mein Sooraj Chal Ke, Tumne Shayad Socha Tha
Mere Sab Mohre Pit Jayege
Maine Ek Chirag Jalakar Roshni Kar Li,
Apna Rasta Khol Liya

Tumne Ek Samandar Haath Mein Lekar Mujhpe Dhel Diya,
Maine Noh Ki Kashti Us Ke Upar Rakh Di,

Kaal Chala Tumne Aur Meri Janib Dekha,
Kaal Chala Tumne Aur Meri Janib Dekha
Maine Kaal Ko Todkar,
Lamha Lamha Jeena Seekh Liya

Meri Khudi Ko Maarna Chaha
Tumne Chand Chamatkaro Se
Meri Ka Maarna Chaha Tumne 
Chand Chamatkaro Se
Aur Mere Ek Pyaade Ne Chalte Chalte
Tera Chaand Ka Mohra Maar Liya

Maut Ki Shay Dekar Tumne Samjha Tha Ab To Maat Huyi,
Maut Ki Shay Dekar Tumne Samjha Tha Ab To Maat Huyi
Maine Jism Ka Khol Utaarkar Saup Diya, 
Aur Rooh Bacha Li 

Poore Ka Poora Aakash Ghuma Kar Ab
Tum Dekho Baazi...
- Gulzar

SHARE

Milan Tomic

Hi. I’m Designer of Blog Magic. I’m CEO/Founder of ThemeXpose. I’m Creative Art Director, Web Designer, UI/UX Designer, Interaction Designer, Industrial Designer, Web Developer, Business Enthusiast, StartUp Enthusiast, Speaker, Writer and Photographer. Inspired to make things looks better.

  • Image
  • Image
  • Image
  • Image
  • Image